सितम्बर माह में लगातार तीन दिन की छुट्टियों का योग बना। 30 सितम्बर का दशहरा, 1 अक्टूबर का रविवार और 2 को गांधी जयंती। लगातार तीन छुट्टियों को योग कोई घुमक्कड़ छोड़ दे.... यम्पॉसिबल।। हां बिलकुल ठीक मैंने भी इन छुट्टियों में घूमने की योजना पहले ही बना रखी थी। इस बार मन में था कि ट्रेकिंग की जाए। इसलिए हर की दून जाने पर विचार करने लगा। अपने घुमक्कड़ों के व्हाट्सअप ग्रुप में जब इस बारे में बात की तो वहा जाने का इच्छुक तो कोई नहीं मिला पर अम्बाला के रहने नरेश सहगल जी ने मुझे अपने साथ रुद्रनाथ ट्रेक पर चलने का ऑफर दिया। रुद्रनाथ ट्रेक भी बहुत मनभावन है। और यदि इस ट्रेक के लिए गया तो सहगल जी का साथ भी मिलता। इन बातों से मेरा मन हर की दून से छलांग लगा सीधा रुद्रनाथ पर पहुंच गया। हम दोनों ने जाने की तारीख, मिलने का स्थान लगभग सभी बुनियादी बातें पहले ही तय कर ली थी। अब हम कहाँ जायेगे, कैसे जायेगे इस पर मैंने कोई जानकारी ग्रहण नहीं की। इन सबकी जिम्मेदारी सहगल जी पहले ही ले चुके थे।
हिंदी का एक यात्रा ब्लॉग (An Indian Travel Blog in Hindi)
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Monday, 10 December 2018
देवप्रयाग, उत्तराखंड- Devprayag, Uttrakhand
सितम्बर माह में लगातार तीन दिन की छुट्टियों का योग बना। 30 सितम्बर का दशहरा, 1 अक्टूबर का रविवार और 2 को गांधी जयंती। लगातार तीन छुट्टियों को योग कोई घुमक्कड़ छोड़ दे.... यम्पॉसिबल।। हां बिलकुल ठीक मैंने भी इन छुट्टियों में घूमने की योजना पहले ही बना रखी थी। इस बार मन में था कि ट्रेकिंग की जाए। इसलिए हर की दून जाने पर विचार करने लगा। अपने घुमक्कड़ों के व्हाट्सअप ग्रुप में जब इस बारे में बात की तो वहा जाने का इच्छुक तो कोई नहीं मिला पर अम्बाला के रहने नरेश सहगल जी ने मुझे अपने साथ रुद्रनाथ ट्रेक पर चलने का ऑफर दिया। रुद्रनाथ ट्रेक भी बहुत मनभावन है। और यदि इस ट्रेक के लिए गया तो सहगल जी का साथ भी मिलता। इन बातों से मेरा मन हर की दून से छलांग लगा सीधा रुद्रनाथ पर पहुंच गया। हम दोनों ने जाने की तारीख, मिलने का स्थान लगभग सभी बुनियादी बातें पहले ही तय कर ली थी। अब हम कहाँ जायेगे, कैसे जायेगे इस पर मैंने कोई जानकारी ग्रहण नहीं की। इन सबकी जिम्मेदारी सहगल जी पहले ही ले चुके थे।
Monday, 18 June 2018
खेल-खेल में- बरसुड़ी, उत्तराखंड - Khel-Khel me -Barsudi, Uttarakhand
दिनाँक- 13 अगस्त 2017, दिन- रविवार
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अगली सुबह 6 बजे उठ कमरे से बाहर गया। मौसम भी खुशनुमा था और मन भी। सचिन जी भी उठ गए। जल्दी से तैयार हो, हम सब पंचायत भवन पहुंच गए। आज एजुकेशन कैम्प है, जिसका आयोजन गांव के स्कूल में होना है। जो यहाँ से 2 किलोमीटर नीचे है। सभी को वही जाना है। पंचायत भवन से कुछ सामान लेकर हम भी चल दिए। निरंतर ढलान उतरते रहे और फोटो लेते हुए चलते रहे। बीच में एक छोटे से झरने के दर्शन हुए, जहाँ लोहे का छोटा सा पुल बना हुआ है। झरने से बहुत कम पानी गिर रहा था। अभी कुछ समय बाद बरसात शुरू हो जानी है। तब इसका यौवन भी पुनः लौट आएगा। यहाँ से कुछ आगे जाने पर बरसुडी गांव का प्राइमरी स्कूल आता है। जिनके प्रधानाचार्य जी के घर पर मैं, सचिन भाई और मुस्तफा भाई, हम तीनो ठहरे हुए है। आज यहाँ जरा सी भी हलचल नहीं थी। कारण था कि आज इस स्कूल के भी सभी विद्यार्थी नीचे वाले बड़े स्कूल में ही जा रहे है। आज सभी को वही एकत्रित होना है। हमारी मंजिल भी वही है फ़िलहाल।
Thursday, 28 September 2017
सपनों का एक गांव, बरसुड़ी, उत्तराखंड - A village of dreams, Barsudi, Uttarakhand
12 अगस्त 2017 , दिन- शनिवार
एक दिन बैठे-बैठे फेसबुक चला रहा था, तो एक पोस्ट पर नज़र गई। जिसमें हेल्थ और एजुकेशनल कैंप के बारे में जिक्र था। लेकिन कुछ खास समझ नहीं आने पर अपने घुमक्कड़ मित्र सचिन त्यागी जी से इस बारे में पूछा गया। सचिन भाई ने काफी कुछ बताया और जो थोड़ा बहुत बच गया, वो रमता जोगी जी उर्फ़ बीनू भाई ने बता दिया। उन्होंने बताया कि अलग-अलग राज्यों से 40-50 घुमक्कड़ मित्र मिलकर निस्वार्थ सेवा भाव से गाँव वालो के लिए एक हेल्थ कैंप का आयोजन करते है। जिसमे बरसुड़ी एवं आस पास के गाँव वालों का मुफ्त में चेकअप करते है और कुछ बुनियादी दवाईयां देते है। और साथ-साथ बरसुड़ी में स्थित स्कूल के बच्चों के लिए एक एजुकेशन कैंप का भी आयोजन करते है। इस बहाने सब एक-दूसरे से मिल भी लेते है। ये तो वाकई में बहुत ही अच्छा लगा मुझे और मैंने तुरंत चलने को हाँ कर दी।
Tuesday, 20 June 2017
सिटी फारेस्ट, ग़ाज़ियाबाद का वीडियो (City Forest Video)
सिटी फारेस्ट, ग़ाज़ियाबाद के पिकनिक स्थलों में से एक है। ये राज नगर एक्सटेंशन पर स्थित है। यहाँ आराम से 3-4 घंटे बिताये जा सकते है। यहाँ साइकिल किराये पर मिलती है। इसके अलावा घुड़सवारी, ऊट की सवारी, नाव की सवारी तथा जीप सवारी का आंनद भी ले सकते है। बच्चों के लिए भी बहुत से झूले मौजूद है जैसे - ट्रेन, मिकी माउस, गोल घूमने वाले आदि। इसके अंदर बच्चों के लिए एक एडवेंचर पार्क भी है। यहाँ इन सबका आनंद लेते हुए खाने का लुफ्त भी उठाया जा सकता है। इसके अंदर मौजूदा कैंटीन में चाउमीन, आइसक्रीम, समोसे, छोले-भटुरे जैसी बहुत से आइटम मिलते है। यह वीडियो (फोटो स्लाइड) सिटी फारेस्ट के अंदर लिए गए कुछ फोटों का संग्रह मात्र है। जिसे दिसम्बर 2016 में लिया गया है। कुल मिलाकर ग़ाज़ियाबाद वासियों के लिए ये किसी तोहफे से कम नहीं है।
Thursday, 15 June 2017
दिल्ली चिड़ियाघर का वीडियो - Delhi Zoo Video
यह वीडियो (फोटो स्लाइड) मैंने चिड़ियाघर में स्थित जानवरों पर बनाई है। इसमें हिरन, अफ़्रीकी हाथी, ईमू, ब्राहम्णी चील, अजगर, जगुआर जैसे जंगली जानवर है। इस (वीडियो) छेत्र में अभी मैं नया हूँ। ज्यादा जानकारी तो नहीं है कि वीडियो कैसे बनाई और एडिट की जाती है। पर जितना पता है उसी के माध्यम से इसे तैयार किया है। इसके अलावा कुछ और वीडियो तैयार की गयी है जो मेरे ब्लॉग पर ही आपको मिल जाएगी। यू-ट्यूब पर मेरे पेज "मैं मुसाफ़िर (Main Musafir)" पर जा कर भी आप मेरे द्वारा बनाई गयी सभी वीडियो देख सकते हो।
Monday, 20 March 2017
गुच्चुपानी, देहरादून का वीडियो - Robber Cave, Dehradun
यह वीडियो गुच्चुपानी का है। इसे रोबर केव के नाम से भी जाना जाता है। यह देहरादून में स्थित है। यह पहाड़ बीच में से दो भागो में बटा हुआ है। और इसकी आकृति ऐसी है कि इससे एक प्रकृति गुफा बनी हुई है जिसके अंदर से पानी जो ऊपर पहाड़ो से आता है, एक छोटे झरने के रूप में गिरता है। पानी कही-कही घुटनों तक मिल जाता है और बहाव इतना तेज होता है यदि चप्पल पहन के इसके अंदर चले गए तो आपकी चप्पल बहने से कोई नहीं बचा सकता। आप भी नहीं। आंनद लीजिये इस वीडियो का। यह सितम्बर 2016 में बनायीं गयी है।
www.mainmusafir.com (मैं मुसाफिर डॉट कॉम )
Monday, 13 February 2017
चिड़ियाघर, दिल्ली (भाग-2) - Delhi Zoo (Part-2)
22 जनवरी 2017, दिन- रविवार (शेष भाग )
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अब घूमते-घूमते थकान महसूस होने लगी थी। वैसे तो यहाँ घूमने के लिए बैटरी से चलने वाले वाहन भी थे। जिसमे बैठकर पूरे चिड़ियाघर पर नज़र दौड़ाई जा सकती थी बिना थके। लेकिन मैं इसके पक्ष में नहीं था। हम यहाँ घूमने को आये है और ना तो हमारी स्थिति पतझड़ के उस पेड़ के सामान है जिस पर अब कुछ ही पत्ते बचे हो। और ना ही उस लाट साहब की तरह जिसने आज तक अपनी कोमल काया को रास्तों, हवा, धुप, बरसात के समक्ष रखकर अपने आस-पास फैली खूबसूरती को पहचानने उससे दोस्ती करने उसकी तक़लिफों को समझने उससे रूबरू होने की कभी कोशिश तक ना की हो। मैंने तो हमेशा प्रकृति को तवज्जो दी है उसके लिए फिर चाहे कितना भी चलना पड़े कितनी भी थकान हो वो सब मेरे लिए मायने नहीं रखता। हालांकि जीता जागता मानव होने के कारण इन सब चीज़ों से मुझे भी परेशानी ज़रूर हो रही थी पर इन जीवों को देखने की मेरी लालसा ने थकान को मुझ पर हावी नहीं होने दिया। वैसे भी ऐसी
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अब घूमते-घूमते थकान महसूस होने लगी थी। वैसे तो यहाँ घूमने के लिए बैटरी से चलने वाले वाहन भी थे। जिसमे बैठकर पूरे चिड़ियाघर पर नज़र दौड़ाई जा सकती थी बिना थके। लेकिन मैं इसके पक्ष में नहीं था। हम यहाँ घूमने को आये है और ना तो हमारी स्थिति पतझड़ के उस पेड़ के सामान है जिस पर अब कुछ ही पत्ते बचे हो। और ना ही उस लाट साहब की तरह जिसने आज तक अपनी कोमल काया को रास्तों, हवा, धुप, बरसात के समक्ष रखकर अपने आस-पास फैली खूबसूरती को पहचानने उससे दोस्ती करने उसकी तक़लिफों को समझने उससे रूबरू होने की कभी कोशिश तक ना की हो। मैंने तो हमेशा प्रकृति को तवज्जो दी है उसके लिए फिर चाहे कितना भी चलना पड़े कितनी भी थकान हो वो सब मेरे लिए मायने नहीं रखता। हालांकि जीता जागता मानव होने के कारण इन सब चीज़ों से मुझे भी परेशानी ज़रूर हो रही थी पर इन जीवों को देखने की मेरी लालसा ने थकान को मुझ पर हावी नहीं होने दिया। वैसे भी ऐसी Monday, 6 February 2017
चिड़ियाघर, दिल्ली (भाग-1) - Delhi Zoo (Part-1)
22 जनवरी 2017, दिन- रविवार
योजना
पिछले कुछ दिनों से सर्दी अच्छी ख़ासी थी। इसी वजह से कही घूमने जाना भी नहीं हो पाया। पर एक मुसाफ़िर के कदम भला कब तक रुक पाते। घुम्मकड़ लोग ज्यादा दिन तक घर में नहीं रह पाते। जैसे ही कुछ दिन गुजरते है वैसे ही कही घूमने की ललक शुरू हो जाती है। और जो अव्वल नंबर के घुम्मकड़ है, वे लोग इस बात को बहुत ही अच्छे से जानते है। सभी घुम्मकड़ लोगो के गुण लगभग मिलते-जुलते होते है जैसे- बीमार होने पर भी ऑफिस से छुट्टी ना लेना। क्योंकि बीमारी में छुट्टी लेंगे तो फिर घूमने के नाम की छुट्टी कहा मिल पायेंगी ? इसलिए कुछ भी ज़रूरी काम हो या बीमारी, छुट्टी लेंगे तो सिर्फ घूमने के लिए। और मैं भी इन्ही में से एक हूँ। दरअसल ऊपर दिए कुछ शब्दों में मैंने अपना हाल ए दिल ही आपको बताया है। Thursday, 19 January 2017
यात्रा चम्बा और ऋषिकेश की
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10 अक्टूबर 2016
धनोल्टी से चम्बा लगभग 30 किलोमीटर दूर है। और अभी 1 घंटे का सफर ओर बाकी था। पहाड़ो पर सिर्फ 25-30 तक की रफ़्तार से ही आप वाहन चला सकते है। क्योकि थोड़ी-थोड़ी दूरी पर घुमावदार मोड़ आते रहते है जो वाहन की रफ़्तार पर ब्रेक लगाने को मजबूर कर देते है। और मोड़ पर मुड़ने पर जैसे ही दोबारा रेस देते है, इतने में अगला मोड़ आ जाता है। इसलिए यहाँ पर किसी भी वाहन की औसत स्पीड 25-30 किलोमीटर प्रति घंटा ही रहती है। इस बीच भी हमने कई जगह बाइक रोकी। अभी सूरज ढलने में कुछ समय था लेकिन तापमान में थोड़ी गिरावट जरूर महसूस हो रही थी। और हवा दिन के मुकाबले ठण्डी होने लगी। इस बार हमने ज्यादा देर नहीं की और समय से ही चम्बा पहुँच गए।
Monday, 2 January 2017
बाइक से मसूरी और धनोल्टी की यात्रा
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अगले दिन सभी 6 बजे उठ गए। बाहर बालकनी में मौसम का जायजा लेने गया तो अक्टूबर के हिसाब से ठण्ड अच्छी खासी मिली और कोहरा भी। तैयार होकर 8 बजे हम यहाँ से निकल गए। सबसे पहले हम उसी रेस्टॉरेन्ट में नाश्ते के लिए गए, जहाँ हमने कल रात खाना खाया था। छोले भटूरो ने हमारे नाश्ते की शान बढाई। उसके बाद हमने चाय पी। अब हम हर तरह से घूमने को तैयार थे। मसूरी उत्तराखंड के देहरादून जिले में पड़ता है। यहाँ के लोगो से मिली जानकारी के अनुसार, यहाँ प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले मंसूर नाम के पौधे के कारण इसका नाम मसूरी पड़ गया है। मसूरी गढ़वाल हिमालय के शिवालिक श्रेणी में स्थित है। यह बहुत ही लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। और दिल्ली के सबसे नजदीक पर्यटन स्थलों में से एक है। जिसके कारण काफी संख्या में लोग यहाँ घूमने के लिए आते है। लेकिन ज्यादा संख्या में पर्यटको के आने से यह शहर जाम,पानी और गंदगी जैसे मुख्य परेशानी से झूझता हुआ प्रतीत होता है। शर्दियो की अपेक्षा यहाँ गर्मियो में अधिक पर्यटक आते है।
Friday, 16 December 2016
गुच्चुपानी की सैर, देहरादून
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देहरादून
कुछ देर में हम गुच्चुपानी पहुँच गए। गुच्चुपानी दरअसल पहाड़ो के बीच बनी एक प्राकर्तिक गुफा है। इसकी लम्बाई लगभग 500-550 मीटर होगी। ये पहाड़ दो भागो में बटा हुआ है। और इसके अंदर से छोटे झरने के रूप में पानी बाहर निकलता है।
देहरादून
कुछ देर में हम गुच्चुपानी पहुँच गए। गुच्चुपानी दरअसल पहाड़ो के बीच बनी एक प्राकर्तिक गुफा है। इसकी लम्बाई लगभग 500-550 मीटर होगी। ये पहाड़ दो भागो में बटा हुआ है। और इसके अंदर से छोटे झरने के रूप में पानी बाहर निकलता है।
Tuesday, 6 December 2016
यात्रा का अगला पड़ाव देहरादून
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| इस फोटो को खास पीछे तेज रफ़्तार से जाते एक ट्रक ने बनाया। (मेरे दाए तरफ राजू और बाये तरफ आशीष) |
Thursday, 24 November 2016
मेरी पहली बाइक यात्रा
दिनाँक 8 अक्टूबर 2016 ...
मैंने इस यात्रा की शुरुवात छुट्टियों को मद्देनज़र रखते हुए की। ऑफिस में बैठे हुए देखा कि 9 तारीख का रविवार है और 11 का दशहरा। लेकिन 10 तारीख को कोई छुट्टी नहीं थी, पर एक दिन की छुट्टी तो ली भी जा सकती है। इन सब बातो को ध्यान में रखते हुए मैंने योजना बनायी की बाइक से देहरादून, मसूरी , धनोल्टी, चम्बा, टिहरी और ऋषिकेश की यात्रा की जाये। ऑफिस के ही एक दोस्त जिसका नाम आशीष है, उससे पूछा कि बाइक से कही घूमने चलोगे क्या? उसको बताया 9 और 11 छुट्टी है बाकि 10 की हम ले लेंगे। इससे ज्यादा छुट्टियों का सदुपयोग और भला क्या हो सकता है कि एक दिन की छुट्टी लेने पर अपने पास टोटल 3 दिन है। आशीष ने चलने के लिए तो हां कर दी। पर वो अब मुझसे आगे कुछ बोल पाता इससे पहले ही उसकी सवालो से भरी निगाहों को पढते हुए मैंने ही अपनी बनायीं हुई योजना के बारे में उसको बताना शुरू किया। मैंने बताया कि हम देहरादून होते हुए मसूरी जायेंगे और वही रात रुकेंगे फिर अगली सुबह मसूरी से धनोल्टी के लिए निकलेंगे, यहाँ कुछ समय रुकने के बाद टिहरी झील देखेगे और उससे अगले दिन ऋषिकेश होते हुए वापिस घर। वाकई में इस यात्रा पर बहुत मजा आने वाला था, क्योकि हम जिस रस्ते से जायेंगे उस रस्ते से वापस नहीं आयेंगे। यानी जाने का रास्ता अलग और आने का रास्ता भी अलग। जाहिर है, ऐसे घूमने में सभी को मजा आता होगा। जिसमे किसी भी रस्ते को दोबारा दोहराना ना पड़े। मुझे तो ऐसे बहुत मजा आता है।
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