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Friday, 4 August 2017

श्री नीलकंठ महादेव मंदिर, पौड़ी गढ़वाल- Shree Neelkanth Mahadev Temple, Pauri Garhwal

इस यात्रा को आरम्भ से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे..... 

14 मई 2017,  दिन- रविवार 
गंगा स्नान कर नाश्ते की तलाश में कुछ जगह छानी पर सुबह 7 का समय होने की वजह से कही कुछ नहीं मिला। अब ऐसे ही आगे की पैदल यात्रा शुरू कर दी। थोड़ा आगे आने पर एक चाय की दुकान खुली मिली। चाय और बिस्कुट का नाश्ता कर मैं आगे बढ़ गया। समय 7:30 का था। मैं योजना बनाये हुए था कि करीब 4 बजे तक मुझे दर्शन कर वापस नीचे लौटकर आना है। तभी मैं आज समय पर घर पहुँच सकता हूँ अन्यथा नहीं। पर दूसरी तरफ मुझे ये अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल लग रहा था कि मैं इतनी जल्दी इस सफर को पूरा कर पाऊंगा या नहीं। मैं श्री नीलकंठ को पहले भी आया हूँ। उस समय नीलकंठ के दर्शन के साथ-साथ, पार्वती मंदिर, झिलमिल गुफा और गणेश गुफा तक भी दोस्तों संग गया था और उसी दिन वापिस ऋषिकेश भी पहुँच गया था। पर अब बात दूसरी है। इन बातों को लगभग 10 साल हो गए। उस समय शारारिक क्षमता और थी तथा अब कुछ और है। इतना समय बीत गया इसलिए खुद पर यकीन कर पाना मुश्किल था पर नामुमकिन नहीं। 

Monday, 24 July 2017

ऋषिकेश: गंगा, योग और आयुर्वेद का अनूठा संगम - Unique Confluence of Ganga, Yoga and Ayurveda


ऋषिकेश स्टेशन की खूबसूरती और शांति मन को भा रही थी। लेकिन आगे तो बढ़ना ही था। इसलिए स्टेशन से बाहर निकल एक ऑटो में राम झूला जाने के लिए बैठ गया। सुबह का वक्त था, भीड़ का तो कोई मतलब ही नहीं था। इसलिए 5 मिनट में ही, मैं राम झूला पहुंच गया। 

ऋषिकेश, उत्तराखंड के देहरादून जिले में आता है। यह समुंद्र तल से लगभग 1300 फीट ऊचाई पर है। गंगा वैसे तो गौमुख से निकलती है पर कई छोटी-छोटी नदियों के संगम से इसका रूप और विशाल हो जाता है। ऋषिकेश में हमारी पवित्र गंगा, पहाड़ों की डगमगाती गलियों को पीछे छोड़, सीधे और सरलता से बहना सीख

Monday, 24 April 2017

जाखू मंदिर, शिमला - Jakhu Mandir, Shimla

दिनांक- 10 मार्च 2017 , दिन- शुक्रवार

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अगले दिन सुबह 06:30 बजे नींद खुल गयी। पर्दा हटा खिड़की से बाहर का मौसम देखा तो पाया की रात को बर्फ गिरी थी जो अब पेड़ो और अन्य जगहों पर साफ़ दिखाई दे रही थी। एक-दो फोटो यही से लिए गए। कम्बल छोड़ते ही ठंड लगने लगी। मन में ख्याल आया कि इतनी सर्दी में नहाकर मरना नहीं। नहाने के लिए पूरी ज़िंदगी पड़ी है.....। फिर किसी और दिन नहा लूंगा.....। यही ठंड में बड़बड़ाते हुए ब्रश करने चला गया। लेकिन पानी देख मूंड नहाने का हो गया। पानी बहुत गर्म था और जितना मर्ज़ी उतना इस्तेमाल कर सकते थे। बिना देरी किये नहा लिया और जो ठंड थी अब तक वो भी नहाते ही गायब हो गयी। गर्म पानी में नहाने से शरीर के अंदर तक गर्मी पहुँच गयी जिससे सर्दी लगनी कुछ देर के लिए बंद हो गयी। एक-एक कर सभी तैयार हो गए। 

Friday, 4 November 2016

श्री बांकेबिहारीजी के दर्शन, मथुरा

यात्रा आरम्भ  
13  अगस्त 2016 (शनिवार)... 

बहुत दिन हो गए थे घर से निकले हुए। जिसकी वजह से मुझे काफी बोरियत हो रही थी। और बोरियत हो भी क्यों ना, मुझे कही घूमे हुए कुछ दिन या महीने नहीं बल्कि साल हो गए थे। तो मन करता था कि कही भाग जाऊ कुछ दिनों के लिए। इस रोज रोज की नौकरी से दिमाग मानो  पूरी तरह चलने को हो गया था। खैर एक दिन बैठे बैठे योजना बनायी कि क्यों ना आगरा के दौरे पर निकला जाए। इस महीने पहले ही मेरी काफी छूट्टी हो गयी थी। तो फिर से मुझे ज्यादा छूट्टी मिलने से तो रही। इसलिए ही आगरा ही ठीक था। पास भी और ज्यादा से ज्यादा 2-3 दिन ही लंगेगे पुरे आगरा को निहारने में। उसी दिन मेरे फुफरे भाई (अरुण) का फ़ोन आ गया। बातो बातो मे मैंने उसको अपने घूमने के बारे में बताया तो वो भी फ़ौरन बोला की भाई मैं भी साथ चल सकता हूँ क्या? यदि तुझे कोई दिक्कत न हो तो। मैंने कहा मुझे कोई परेशानी नहीं है। तुम भी चलो।