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Monday, 27 February 2017

मेरी आगामी यात्रा



अपनी इस पोस्ट में मैं किसी यात्रा वृतांत का जिक्र नहीं कर रहा। पिछले कुछ दिनों से मेरे घूमने पर मानो ग्रहण सा लग गया। इन दिनों कही पर भी जाना नहीं हो पाया। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि दिमाग में रह-रहकर घूमने वाला कीड़ा शांत बैठा है। वो तो निरंतर अपनी ओर से प्रयास किये जा रहा है कही घूम आने के लिए। पर मैं ही शांति बनाये हुए हूँ। उसका भी एक कारण है। 

Tuesday, 21 February 2017

कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां चिड़ियाघर के बारे में - Some Important Information About Delhi Zoo


चिड़ियाघर की यात्रा को आरम्भ से पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करे......


चिड़िया घर घूम तो लिए और वहाँ उपस्थित लगभग सभी जानवरों और पक्षियों से भी रूबरू होने का पूरा मौका और समय हमे मिला। अब कुछ जानकारियां यहाँ के बारे में भी लिखना ज़रूरी है। आइये शुरुआत करते है -

Monday, 13 February 2017

चिड़ियाघर, दिल्ली (भाग-2) - Delhi Zoo (Part-2)

22 जनवरी 2017, दिन- रविवार  (शेष भाग )


इस यात्रा को आरम्भ से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे..... 





अब घूमते-घूमते थकान महसूस होने लगी थी। वैसे तो यहाँ घूमने के लिए बैटरी से चलने वाले वाहन भी थे। जिसमे बैठकर पूरे चिड़ियाघर पर नज़र दौड़ाई जा सकती थी बिना थके। लेकिन मैं इसके पक्ष में नहीं था। हम यहाँ घूमने को आये है और ना तो हमारी स्थिति पतझड़ के उस पेड़ के सामान है जिस पर अब कुछ ही पत्ते बचे हो। और ना ही उस लाट साहब की तरह जिसने आज तक अपनी कोमल काया को रास्तों, हवा, धुप, बरसात के समक्ष रखकर अपने आस-पास फैली खूबसूरती को पहचानने उससे दोस्ती करने उसकी तक़लिफों को समझने उससे रूबरू होने की कभी कोशिश तक ना की हो। मैंने तो हमेशा प्रकृति को तवज्जो दी है उसके लिए फिर चाहे कितना भी चलना पड़े कितनी भी थकान हो वो सब मेरे लिए मायने नहीं रखता। हालांकि जीता जागता मानव होने के कारण इन सब चीज़ों से मुझे भी परेशानी ज़रूर हो रही थी पर इन जीवों को देखने की मेरी लालसा ने थकान को मुझ पर हावी नहीं होने दिया। वैसे भी ऐसी

Monday, 6 February 2017

चिड़ियाघर, दिल्ली (भाग-1) - Delhi Zoo (Part-1)

22 जनवरी 2017, दिन- रविवार  


योजना 

पिछले कुछ दिनों से सर्दी अच्छी ख़ासी थी। इसी वजह से कही घूमने जाना भी नहीं हो पाया। पर एक मुसाफ़िर के कदम भला कब तक रुक पाते। घुम्मकड़ लोग ज्यादा दिन तक घर में नहीं रह पाते। जैसे ही कुछ दिन गुजरते है वैसे ही कही घूमने की ललक शुरू हो जाती है। और जो अव्वल नंबर के घुम्मकड़ है, वे लोग इस बात को बहुत ही अच्छे से जानते है। सभी घुम्मकड़ लोगो के गुण लगभग मिलते-जुलते होते है जैसे- बीमार होने पर भी ऑफिस से छुट्टी ना लेना। क्योंकि बीमारी में छुट्टी लेंगे तो फिर घूमने के नाम की छुट्टी कहा मिल पायेंगी ? इसलिए कुछ भी ज़रूरी काम हो या बीमारी, छुट्टी लेंगे तो सिर्फ घूमने के लिए। और मैं भी इन्ही में से एक हूँ। दरअसल ऊपर दिए कुछ शब्दों में मैंने अपना हाल ए दिल ही आपको बताया है।