Pages

Thursday, 23 March 2017

अबकी बार शिमला यार -Abki Baar Shimla Yaar



 दिनाँक- 08 मार्च 2017 ,  दिन- बुधवार 


अपनी शिमला यात्रा के बारे में आपको पहले ही अवगत करा चुका हूँ। शिमला का बहुत नाम सुना था और यह पर्यटकों के बीच बहुत ही लोकप्रिय है। इसलिए इसकी पहचान ने हमे भी अपनी ओर आकर्षित कर ही लिया। इच्छा थी कि शिमला बस से ना जाकर रेल से जाया जाये। गाज़ियाबाद से कालका हावड़ा-दिल्ली-कालका मेल और फिर कालका से शिमला के बीच चलने वाली टॉय ट्रेन में सफ़र करने पर विचार हुआ। यानी घर से शिमला तक का पूरा सफ़र सिर्फ रेल से। और वैसे भी कालका-शिमला के बीच चलने वाली रेल के बारे में मैंने भी बहुत सुना था।

Monday, 27 February 2017

मेरी आगामी यात्रा



अपनी इस पोस्ट में मैं किसी यात्रा वृतांत का जिक्र नहीं कर रहा। पिछले कुछ दिनों से मेरे घूमने पर मानो ग्रहण सा लग गया। इन दिनों कही पर भी जाना नहीं हो पाया। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि दिमाग में रह-रहकर घूमने वाला कीड़ा शांत बैठा है। वो तो निरंतर अपनी ओर से प्रयास किये जा रहा है कही घूम आने के लिए। पर मैं ही शांति बनाये हुए हूँ। उसका भी एक कारण है। 

Monday, 20 February 2017

कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां चिड़ियाघर के बारे में


चिड़ियाघर की यात्रा को आरम्भ से पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करे......


चिड़िया घर घूम तो लिए और वहाँ उपस्थित लगभग सभी जानवरों और पक्षियों से भी रूबरू होने का पूरा मौका और समय हमे मिला। अब कुछ जानकारियां यहाँ के बारे में भी लिखना ज़रूरी है। आइये शुरुआत करते है -

Sunday, 12 February 2017

चिड़ियाघर, दिल्ली (भाग-2)

22 जनवरी 2017, दिन- रविवार  (शेष भाग )


इस यात्रा को आरम्भ से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे..... 





अब घूमते-घूमते थकान महसूस होने लगी थी। वैसे तो यहाँ घूमने के लिए बैटरी से चलने वाले वाहन भी थे। जिसमे बैठकर पूरे चिड़ियाघर पर नज़र दौड़ाई जा सकती थी बिना थके। लेकिन मैं इसके पक्ष में नहीं था। हम यहाँ घूमने को आये है और ना तो हमारी स्थिति पतझड़ के उस पेड़ के सामान है जिस पर अब कुछ ही पत्ते बचे हो। और ना ही उस लाट साहब की तरह जिसने आज तक अपनी कोमल काया को रास्तों, हवा, धुप, बरसात के समक्ष रखकर अपने आस-पास फैली खूबसूरती को पहचानने उससे दोस्ती करने उसकी तक़लिफों को समझने उससे रूबरू होने की कभी कोशिश तक ना की हो। मैंने तो हमेशा प्रकृति को तवज्जो दी है उसके लिए फिर चाहे कितना भी चलना पड़े कितनी भी थकान हो वो सब मेरे लिए मायने नहीं रखता। हालांकि जीता जागता मानव होने के कारण इन सब चीज़ों से मुझे भी परेशानी ज़रूर हो रही थी पर इन जीवों को देखने की मेरी लालसा ने थकान को मुझ पर हावी नहीं होने दिया। वैसे भी ऐसी जगह वाहन से घूमने क्या मजा। एक चक्कर इस रोड पर लगा एक चक्कर दूसरी पर.....फिर तीसरी ...... फिर 1-2 घंटे में यहाँ सब देखकर बाहर का रास्ता ढूंढने लग जाओ। ये भी कोई घूमना हुआ। इससे अच्छा तो घर से ना ही निकलते तो वो ही मेरे लिए ज्यादा राहत देने वाला मलहम होता। 

Monday, 6 February 2017

चिड़ियाघर, दिल्ली (भाग-1)

22 जनवरी 2017, दिन- रविवार  


योजना 

पिछले कुछ दिनों से सर्दी अच्छी ख़ासी थी। इसी वजह से कही घूमने जाना भी नहीं हो पाया। पर एक मुसाफ़िर के कदम भला कब तक रुक पाते। घुम्मकड़ लोग ज्यादा दिन तक घर में नहीं रह पाते। जैसे ही कुछ दिन गुजरते है वैसे ही कही घूमने की ललक शुरू हो जाती है। और जो अव्वल नंबर के घुम्मकड़ है, वे लोग इस बात को बहुत ही अच्छे से जानते है। सभी घुम्मकड़ लोगो के गुण लगभग मिलते-जुलते होते है जैसे- बीमार होने पर भी ऑफिस से छुट्टी ना लेना। क्योंकि बीमारी में छुट्टी लेंगे तो फिर घूमने के नाम की छुट्टी कहा मिल पायेंगी ? इसलिए कुछ भी ज़रूरी काम हो या बीमारी, छुट्टी लेंगे तो सिर्फ घूमने के लिए। और मैं भी इन्ही में से एक हूँ। दरअसल ऊपर दिए कुछ शब्दों में मैंने अपना हाल ए दिल ही आपको बताया है। 

Saturday, 28 January 2017

सिटी फारेस्ट-ग़ाज़ियाबाद

04 दिसम्बर 2016 (दिन- रविवार) 


आज के दिन, घूमने का ना कोई मन था ना कोई पहले से बनाई हुई योजना। मैंने एक हेल्थ इन्सोरेन्स कराया था। जिसके लिए मुझे सुबह पत्नी और बेटे के साथ मेडिकल टेस्ट कराने को जाना था। जिसकी मैंने डॉक्टर से पहले ही अपॉइंटमेंट ले रखी थी। उम्मीद थी कि कम से कम 3 घंटे तो ख़राब हो ही जायेगे और घर से इंदिरापुरम जाना और आना, यह समय अलग से लगेगा। यानी आधा दिन आज इसी काम की भेंट चढ़ने वाला था। इसलिए ही मैंने कहीँ और जाने के बारे में सोचा भी नहीं।

Thursday, 19 January 2017

यात्रा चम्बा और ऋषिकेश की


इस यात्रा को आरम्भ से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे..... 



10 अक्टूबर 2016 

धनोल्टी से चम्बा लगभग 30 किलोमीटर दूर है। और अभी 1 घंटे का सफर ओर बाकी था। पहाड़ो पर सिर्फ 25-30 तक की रफ़्तार से ही आप वाहन चला सकते है। क्योकि थोड़ी-थोड़ी दूरी पर घुमावदार मोड़ आते रहते है जो वाहन की रफ़्तार पर ब्रेक लगाने को मजबूर कर देते है। और मोड़ पर मुड़ने पर जैसे ही दोबारा रेस देते है, इतने में अगला मोड़ आ जाता है। इसलिए यहाँ पर किसी भी वाहन की औसत स्पीड 25-30 किलोमीटर प्रति घंटा ही रहती है। इस बीच भी हमने कई जगह बाइक रोकी। अभी सूरज ढलने में कुछ समय था लेकिन तापमान में थोड़ी गिरावट जरूर महसूस हो रही थी। और हवा दिन के मुकाबले ठण्डी होने लगी। इस बार हमने ज्यादा देर नहीं की और समय से ही चम्बा पहुँच गए।

Sunday, 1 January 2017

बाइक से मसूरी और धनोल्टी की यात्रा

इस यात्रा को आरम्भ से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे......





अगले दिन सभी 6 बजे उठ गए। बाहर बालकनी में मौसम का जायजा लेने गया तो अक्टूबर के हिसाब से ठण्ड अच्छी खासी मिली और कोहरा भी। तैयार होकर 8 बजे हम यहाँ से निकल गए। सबसे पहले हम उसी रेस्टॉरेन्ट में नाश्ते के लिए गए, जहाँ हमने कल रात खाना खाया था। छोले भटूरो ने हमारे नाश्ते की शान बढाई। उसके बाद हमने चाय पी। अब हम हर तरह से घूमने को तैयार थे। मसूरी उत्तराखंड के देहरादून जिले में पड़ता है। यहाँ के लोगो से मिली जानकारी के अनुसार, यहाँ प्रचुर मात्रा में  पाए जाने वाले मंसूर नाम के पौधे के कारण इसका नाम मसूरी पड़ गया है। मसूरी गढ़वाल हिमालय के शिवालिक श्रेणी में स्थित है। यह बहुत ही लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। और दिल्ली के सबसे नजदीक पर्यटन स्थलों में से एक है। जिसके कारण काफी संख्या में लोग यहाँ घूमने के लिए आते है। लेकिन ज्यादा संख्या में पर्यटको के आने से यह शहर जाम,पानी और गंदगी जैसे मुख्य परेशानी से झूझता हुआ प्रतीत होता है। शर्दियो की अपेक्षा यहाँ गर्मियो में अधिक पर्यटक आते है।  

Friday, 16 December 2016

गुच्चुपानी की सैर, देहरादून

इस यात्रा को आरम्भ से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे....

देहरादून 


कुछ देर में हम गुच्चुपानी पहुँच गए। गुच्चुपानी दरअसल पहाड़ो के बीच बनी एक प्राकर्तिक गुफा है। इसकी लम्बाई लगभग 500-550 मीटर होगी। ये पहाड़ दो भागो में बटा हुआ है। और इसके अंदर से छोटे झरने के रूप में पानी बाहर निकलता है।


Monday, 5 December 2016

यात्रा का अगला पड़ाव देहरादून


इस यात्रा को आरम्भ से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे.........  


इस फोटो को खास पीछे तेज रफ़्तार से जाते एक ट्रक ने बनाया। (मेरे दाए तरफ राजू और बाये तरफ आशीष)